बिहार मे भूमि सर्वे और बेतियाराज की वसीयत

बेतिया राज के असली वारिस स्वर्गीय भगवती शरण सिंह थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सन् 2012 ईस्वी में उनको बेतिया राज का असली वारिस मानकर संपत्ति का असली हकदार बताकर उनके पक्ष में फैसला सुनाया था लेकिन बिहार सरकार ने संपत्ति सौंपने से इंकार कर दिया था। बेतिया राज के नामधारी राजा स्वर्गीय भगवती शरण सिंह के तीनों बेटों ने इस मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। मामला अभी लंबित है। बेतिया राज की अंतिम महारानी जानकी कुंअर ने इलाहाबाद में अपने रिश्तेदार के घर रहते हुए अपने रिश्तेदार भगवती शरण सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। बेतिया राज में अंग्रेज और उनके चापलूसों की प्रतारणा से तंग होकर महारानी जानकी कुंअर अपने रिस्तेदार भगवती शरण सिंह के घर इलाहाबाद चली गई थी वहीं रहते हुए महारानी जानकी कुंअर की मृत्यु हुई थी। भगवती शरण सिंह के परिवार ने आदर - सम्मान एवं पूरी निष्ठा से महारानी की सेवा किया था। महारानी द्वारा लिखित वसीयतनामा के कागजात भगवती शरण सिंह के पास सुरक्षित हैं, जिसके आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। बेतिया राज की संपत्ति के मामले में शुरू से ही बिहार सरकार की मनमानी चलती रही है।
जिस रीती से बेतिया राज की सम्पदा बिहार सरकार हड़प रही क्या भरोषा की तमाम वंशावलियां देने के बाद भी सर्वे के नाम पर आपकी संपत्ति सरकार ना हड़पेगी? आज भूमिहार ब्राह्मणों के जैथरिया लोगों के साथ जो हो रहा कल आपके साथ नहीं होगा क्या?
भूदान मे आपके द्वारा किये गए 32 लाख हेक्ट भू दान की जमीन का बिहार - झारखण्ड सरकार ने क्या किया अब तक?

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